देवेंद्र मांझी की पुण्यतिथि में बोले शिबू सोरेन -आदिवासी-गैरआदिवासी सभी झारखंडी

 

पश्चिमी सिंहभूम। पश्चिमी सिंहभूम जिले के गोइलकेरा गांव में रविवार को शहीद देवेंद्र मांझी की 23वीं पुण्यतिथि पर शहीद देवेंद्र मांझी स्मारक समिति व झामुमो प्रखंड कमेटी की ओर से श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। सभा के मुख्य अतिथि जेएमएम सुप्रीमों शिबू सोरेन ने संबोधित करते हुए कहा कि हड़िया व दारू के पीछे लोग भाग रहे हैं। हड़िया धार्मिक मामलों से जुड़ा है इसलिए चलेगा, लेकिन दारू को छोड़ दें।


आदिवासी-गैरआदिवासी एक- शिबू सोरेन

शिबू सोरेन ने आदिवासी-गैर आदिवासी मसले पर कहा कि झारखंड में रहने वाले आदिवासी व गैर आदिवासी की भले ही संस्कृति, रहन सहन, रीति रिवाज अलग-अलग हों, लेकिन झारखंड में रहने वाले सभी झारखंडी हैं। इसलिए सभी को एकता के साथ आपसी भाईचारा के साथ रहना चाहिए।

बीजेपी सरकार के खिलाफ एकजुट हों- जोबा मांझी

 

शहीद देवेन्द्र मांझी की पत्नी और मनोहरपुर विधायक जोबा मांझी ने कहा कि स्वर्गीय देवेन्द्र मांझी ने अपनी शहादत देकर आदिवासियों को जल, जंगल और जमीन पर अधिकार दिलाया। अब सरकार उनका अधिकार छीनना चाहती है। लोगों को उनके अधिकार से वंचित करना चाहती है। हम सब को एकजुट होकर बीजेपी सरकार से मुकाबला करना होगा।

पिछड़ों को मिलेगा आरक्षण- दशरथ गागराई

खरसवां विधायक दशरथ गागराई ने कहा कि रघुवर सरकार पिछड़ों को आरक्षण नहीं दे रही है। लेकिन झारखंड में झामुमो की सरकार बनी तो पिछड़ों को बिहार के समय में जो आरक्षण मिलता था, उसे पुन: दिया जाएगा।

जंगल आंदोलन के प्रमुख नेता थे देवेंद्र मांझी

देवेन्द्र माझी को जंगल में रहने वाले आदिवासियों की आवाज कहा जाता था। आदिवासी किसान परिवार में 15 सितम्बर 1947 को देवेन्द्र माझी ने जन्म लिया था। तीन भाइयों एवं छह बहनों में सबसे छोटे देवेन्द्र माझी के सर से पांच वर्ष की बाल्यावस्था में ही पिता का साया उठ गया। सामाजिक असमानता से क्षुब्ध देवेंद्र मांझी ने मैट्रिक के बाद पढ़ाई छोड़ दी। कोल्हान, पोड़ाहाट के चप्पे-चप्पे पर पैदल घूमते हुए लोगों को जगाया व क्रांति के लिए उद्वेलित किया।

बीड़ी कंपनी के खिलाफ आंदोलन और शिबू सोरेन से मुलाकात

देवेंद्र मांझी ने 1969 में बीड़ी श्रमिकों को संगठित कर कंपनियों के विरुद्ध आन्दोलन का आगाज़ किया। जिसकी प्रतिक्रिया में बीड़ी कंपनियों के दबाव पर देवेन्द्र मांझी को सर्वप्रथम 1971 में बांझीकुसुम गांव की घेरेबन्दी कर गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के पश्चात इन्हें हजारीबाग जेल भेज दिया गया। जेल में इनकी मुलाकात शिबू सोरेन से हुई। इन दोनों ने संयुक्त रूप से अपने अपने क्षेत्र में झारखंड अलग प्रांत हासिल करने के लिए कार्य करने का संकल्प लिया।

जंगल आंदोलन और उनकी हत्या

जेल से रिहा होने के बाद देवेंद्र मांझी ने जंगलों में बसे मूलवासियों के नाम जमीन नियमित करवाने हेतु सरकार के विरुद्ध जोरदार आन्दोलन छेड़ दिया। आन्दोलन जंगल की समतल भूमि पर झाड़ियां साफ कर खेती करने को प्रेरित करने हेतु किया गया था। स्वार्थी तत्वों ने मौके का फायदा उठाकर सैकड़ों एकड़ जंगल के पेड़ काट डाले और इसका इल्जाम देवेन्द्र मांझी के सर मढ़ दिया गया। जंगल आन्दोलन के नेतृत्वकर्ता देवेन्द्र माझी की 14 अक्टूबर 1994 को हत्यारों ने गोईलकेरा हाट बाजार में हत्या कर दी गई।

श्रद्धांजलि सभा में मुख्य अतिथि झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन के अलावे विशिष्ट अतिथियों में विधायक दशरथ गागराई, शशिभूषण सामड, निरल पूर्ति, सोनाराम देवगम, भुवनेश्वर महतो आदि शामिल हुए और शाहिद देवेंद्र मांझी की समाधि स्थल में श्रद्धांजलि दिए। कार्यक्रम से पूर्व जोबा मांझी ने भी शहीद देवेंद्र मांझी के समाधि स्थल पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

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