सोवेद्र शेखर की किताब ‘द आदिवासी विल नॉट डांस’ से जल्द हटेगा प्रतिबंध

रांची। साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार से सम्मानित डॉ. हांसदा सोवेद्र शेखर की किताब ‘द आदिवासी विल नॉट डांस’ पर लगे प्रतिबंध को जल्द ही हटा लिया जाएगा। झारखंड सरकार के मंत्री सरयू राय ने कहा है कि किताब में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं पाया गया है। जल्द ही किताब से प्रतिबंध हटा लिया जाएगा।

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राज्य सरकार ने दिया क्लीन चिट

राज्य सरकार ने मंगलकर को सदन में बताया कि उन्हें इस किताब में किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक कुछ नहीं मिला है। दरअसल प्रतिबंध के बाद झारखंड सरकार ने आदिवासी समाज के जानकारों और लेखकों की एक टीम बनाई थी, जिसनें किताब में लिखी सामग्रियों की जांच की। टीम ने जांच के बाद रिपोर्ट बनाई जिसे 12 दिसंबर, 2017 को विधानसभा में पेश की गई।

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अगस्त में लगा था किताब पर प्रतिबंध

हांसदा सोवेंद्र शेखर द्वारा लिखी गई किताब “आदिवासी विल नॉट डांस” पर इस साल अगस्त में झारखंड सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया था। लेखक हांसदा सोवेंद्र शेखर पर आरोप था कि किताब में संथाल समाज की महिलाओं को गलत तरिके से  दर्शाया गया है। “आदिवासी विल नॉट डांस” संथाल समुदाय पर आधारित किताब है। यह किताब 2015 में प्रकाशित हुई थी।

निलंबित हैं डॉक्टर हांसदा

किताब पर प्रतिबंध लगने के बाद पाकुड़ में पोस्टेड डॉक्टर हांसदा को निलंबित कर दिया गया था। क्योंकि उन्होंने राज्य सरकार से किताब लिखने के लिए अनुमति नहीं ली थी।

लेखक हांसदा पर आरोप बेबुनियाद

लेखक हांसदा के खिलाफ मुहिम चलाने वालों ने आरोप लगाया है कि उन्होंने अपनी किताब में संथाल समुदाय की महिलाओं को गलत दिखाया है। हालांकि राज्य सरकार ने सदन में साफ कर दिया है कि लेखक ने आदिवासी समाज और संथाल समुदाय की महिलाओं के खिलाफ कुछ गलत या अश्लील नहीं लिखा है।

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