“दि आदिवासी विल नॉट डांस” किताब पर झारखंड सरकार ने लगाया बैन

 

पाकुड़। लेखक हांसदा सोवेंद्र शेखर की किताब “दि आदिवासी विल नॉट डांस” पर झारखंड सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया है। मुख्यमंत्री रघुवर दास ने शुक्रवार को मुख्य सचिव राजबाला वर्मा को किताब की सभी प्रतियों को जब्त करने और लेखक के विरूद्ध कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि पाकुड़ डीसी इस पर तत्काल कार्र्वाई करे।

डॉ हांसदा सोवेंद्र शेखर पेशे से डॉक्टर हैं। वह पाकुड़ जिला के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 2012 से अब तक कार्यरत हैं। डॉ हांसदा पूर्वी सिंहभूम जिला के घाटशिला के रहने वाले है।

मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को एक समाचार पत्र में छपी खबर पर संज्ञान लेते हुए यह कार्रवाई की है। उन्होंने संज्ञान लेने के बाद मुख्य सचिव से कहा कि संताल जनजातीय महिलाओं की अस्मिता और उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली इस किताब को पूरे झारखंड में कही भी बिकने या इसके किसी भी अंश को प्रसारित एंव प्रचारित करने पर पूरी तरह रोक रहेगी।

“दि आदिवासी विल नॉट डांस” एक कहानी संग्रह है। इस कहानी संग्रह के लिए युवा लेखक डॉ हांसदा सोवेंद्र शेखर को साहित्य अकादमी ने वर्ष 2015 का “साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार” से सम्मानित किया था। इसमें एक इरोटिका लिखी गई है, जिसका शीर्षक है “सीमेन, स्लाइवा, स्वेट, बल्ड”। इस इरोटिका से ही विवाद शुरू हुआ। लोगों ने आरोप लगाया कि यह साहित्य नहीं बल्कि पोर्न राइटिंग है। इसके बाद से ही किताब पर प्रतिबंध लगाने की मांग उठने लगी थी। हालांकि इस किताब को दूसरी भाषाओं में भी प्रकाशित किया गया है।

घाटशिला के रहने वाले डॉ हांसदा सोवेंद्र शेखर 15 साल की उम्र से ही लिखना शुरू कर दिया था। अंग्रेजी भाषा में शिक्षा ग्रहण करने वाले डॉ हांसदा ने 2007 के बाद से साहित्य लिखना शुरू किया। इनकी पहली रचना “द मिस्टीरीयस अलमेंट ऑफ रूपी बास्की” काफी चर्चा में रही थी। इस किताब का प्रकाशन 2014 में हुआ था। इस किताब के माध्यम से पहली बार अंग्रेजी में किसी संथाल लेखक ने संथाली जीवन को उकेरा है। रूपी बास्की के इर्द-गिर्द बुनी गई इस कहानी में झारखंड पार्टी का उदय, झारखंड आदोंलन की कहानी, उसके चरित्र को भी समाहित किया गया था। “द मिस्टीरीयस अलमेंट ऑफ रूपी बास्की” को “द हिंदू प्राइज 2014” के लिए भी नामित किया गया था।

 

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