राज्यपाल ने वापस किया सीएनटी-एसपीटी बिल

 

रांची। सीएनटी-एसपीटी एक्ट में बदलाव के विधेयक को राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने वापस लौटा दिया है. विपक्ष और सामाजिक संगठनों ने इस बिल को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज कर दिया था. इस बिल पर राज्यपाल को 192 आपत्तियां प्राप्त हुई थी. राज्यपाल ने पुनर्विचार के लिए बिल को लौटाया है.

सीएनटी-एसपीटी एक्ट में बदलाव के विधेयक को विधानसभा में पास कर राज्यपाल के पास स्वीकृती के लिए भेजा गया था। इस बिल के विधानसभा से पारित होने के बाद से ही विपक्ष और सामाजिक संगठन विरोध में उतर आये थे। पूरे राज्य में सीएनटी-एसपीटी एक मुद्दा बन गया था जिससे सरकार घिरते दिख रही थी। राज्यपाल के बिल लौटाने पर कोई भी भाजपा नेता कुछ कहने से बचते दिख रहे हैं. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुआ ने भी इस पर कुछ भी कहने से इंकार कर दिया।

राज्यपाल द्वारा बिल लौटेने के बाद सरकार यदि दोबारा इस बिल को पारित कर राज्यपाल के पास भेजती है तो राज्यपाल को यह बिल पारित करना होगा। राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू के लिए यह संवैधानिक मजबूरी होगी। लेकिन सरकार इस पर क्या फैसला करती है अभी कुछ तय नहीं है। कुछ जानकार यह कह रहे हैं कि राज्यभर में हो रहे आंदोलन और लिट्टीपाड़ा उपचुनाव में मिली हार को देखते हुए बीजेपी इस बिल से अपने हाथ खींच सकती है।

लेकिन विपक्ष इस मुगालते में नहीं रहना चाहता है कि बीजेपी क्या करेगी और क्या नहीं। लेकिन जेएमएम नेता हेमंत सोरेन ने साफ कहा कि बिल को सरकार वापस ले नहीं तो राज्य में आंदोलन जारी रहेगा. साथ ही उन्होंने यह भी कहा की सरकार को फिर से स्थानीय नीति और नियोजन नीति भी झारखण्ड मूल वासियों व आदिवासियों के विरोध में बनाया गया है इसे भी फिर से परिभाषित करे.

बिल लौटाने का स्वागत करते हुए कांग्रेस ने कहा कि सीएनटी-एसपीटी एक्ट में संशोधन का मामला हमेशा के लिए सरकार दफन करे, इसे दोबारा राज्यपाल के पास स्वीकृति के लिए भेजना आत्मघाती होगा।

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