रिम्स में एनेस्थीसिया टेक्निशियन की छात्र सुलेखा कुमारी (24) ने जोड़ा तालाब के समीप स्थित किराए के कमरे में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। उसने पंखे से दुपट्टे के सहारे फांसी लगाई।

शुक्रवार को ही सेंट माग्रेट में बीएड में नामांकन के लिए उसका साक्षात्कार होना था। उसने खुदकुशी इसलिए की, क्योंकि उसके शैक्षणिक प्रमाण पत्र रिम्स में फंसे हुए थे। इसके कारण भी वह तनाव में थी। यह कहना है कि उसके पिता इराधन महतो का। वे तमाड़ थाना क्षेत्र के जोजोडीह के रहने वाले हैं। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।

तमाड़ में अस्पताल में नर्सिग सहायक हैं पिता, मां सुपरवाइजर:

पिता इराधन महतो तमाड़ में ही अस्पताल में नर्सिग सहायक हैं। वहीं पर सुलेखा की मां सुपरवाइजर हैं। पिता के अनुसार सुलेखा ने रांची के जेल मोड़ स्थित आवासीय उच्च विद्यालय से मैटिक की पढ़ाई की थी। इसके बाद सेंट जेवियर्स स्कूल, बुंडू से इंटर और पीपीके कॉलेज, बुंडू से स्नातक करने के बाद वर्ष 2014 में रांची आ गई थी। रांची में रिम्स के नर्सिग कॉलेज में एनेस्थीसिया टेक्निशियन की पढ़ाई कर रही थी।

बहन के साथ सहजानंद नगर में किराए की मकान में रहती थी:

सुलेखा के साथ रांची में छोटी बहन प्रियंका भी रहती थी। दोनों जोड़ा तालाब गली नंबर एक के सहजानंद नगर में किराए के मकान में रह रही थी। पढ़ाई के दौरान रिम्स के ओटी में ड्यूटी के दौरान सुलेखा को कई बार चक्कर आ गया था, जिसके बाद से उसने कॉलेज जाना छोड़ दिया था। इसके बाद उसने शिक्षक बनने के लिए तैयारी शुरू कर दी थी।

प्रमाणपत्र नहीं मिलने से तनाव में थी:

24 अप्रैल को ही उसने बीएड में दाखिले के लिए परीक्षा दी थी, जिसमें पास हो गई थी। शुक्रवार को सेंट माग्रेट्र में उसका साक्षात्कार था। इसके लिए उसे रिम्स में जमा मूल प्रमाण पत्र की आवश्यकता थी। काफी प्रयास किया, लेकिन प्रमाण पत्र नहीं मिला था। इसके बाद से ही वह तनाव में रह रही थी। उसके प्रमाण पत्र को निकालने के लिए ही उसका फुफेरा भाई परमेश्वर महतो रांची आया था। सुलेखा चार बहनों में सबसे बड़ी थी। छोटी बहन प्रियंका भी नर्सिग कॉलेज से लैब टेक्निशियन का कोर्स कर रही है। तीसरे नंबर पर अंजू कुमारी है, वहीं छोटी बहन इशिका महतो बुंडू में ही पढ़ती है। पोस्टमार्टम के दौरान एफएमटी विभाग में सुलेखा की सहेलियां व उसके कक्षा के अन्य साथी पहुंच गए थे। सभी इस घटना के बाद से ही आहत थे।

 

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