हिरणपुर पशु हाट का जोहार खबर ने लिया जायजा

 

पाकुड़। हिरणपुर में लगने वाला पशु हाट संथाल परगना का सबसे बड़ा पशु हाट है। यह ना सिर्फ संथाल परगना बल्कि बिहार के सोनपुर के बाद लगने वाला सबसे बड़ा पशु हाट है। हिरणपुर पशु हाट में व्यापार करने के लिए झारखंड, पश्चिम बंगाल, बांग्लादेश, नेपाल, बिहार, उत्तर प्रदेश के व्यापारी पहुंचते हैं।

झारखंड के पाकुड़ जिला में स्थित हिरणपुर पशु हाट की सलाना डाक राशि करीब 44 लाख रूपये है। डाक राशि अधिक होने के कारण किसी भी व्यक्ति ने 2007-08 से डाक नहीं लिया है। सरकारी अधिकारी ही राजस्व का उठाव करते आ रहे हैं।

हिरणपुर और उसके आस-पास के कई गांवों के लोगों को रोजी-रोटी इस पशु हाट से जुड़ी हुई है। इन लोगों की रोजी-रोटी पशुओं की खरीद-बिक्री के साथ ही साथ घांस-पुआव और गोबर-गोयठा की खरीद-बिक्री से भी जुड़ी हुई है।

फिलहाल हिरणपुर का पशु हाट बंद है। नियमों की सख्ती के कारण पशु हाट में व्यापारियों ने आना बंद कर दिया है। पर्यावरण मंत्रालय के पशु क्रूरता निरोधक अधिनियम के कारण पशु हाट बंद हुआ है।

 

पाकुड़ जिला प्रशासन द्वारा केंद्र सरकार के नियमों के पालन के कारण हिरणपुर का पशु बाजार पूरी तरह प्रभावित हो गया है। पाकुड़ जिला के एसडीओ जितेंद्र कुमार देव ने हिरणपुर पशु हाट के व्यापारियों के साथ बैठक कर संशोधित नियमों की जानकारी दे चुके हैं। उन्होंने साफ कहा है कि नियमों के तहत ही पशुओं की खरीद-बिक्री की जाए अन्यथा दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।

संथाल परगना के इस पिछड़े इलाके में लोगों की रोजी-रोटी का यह सबसे बड़ा केंद्र है। हिरणपुर पशु हाट के बंद होने के बाद इस हाट पर रोजी-रोटी के लिए आश्रित लोग अब अन्य राज्यों में काम करने के लिए पलायन करने लगे हैं।

स्थानीय सांसद विजय हांसदा ने सरकार के इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है। सासंद का कहना है कि संथाल परगना की पहचान और संस्कृति का हिस्सा रही हिरणपुर पशु हाट पर नियम का डंडा चलाकर हाट को बंद करना सरकार की साजिश है।

जोहार खबर ने गुरूवार (10 अगस्त) को हिरणपुर के पशु हाट का जायजा लिया और वहां मौजूद ग्रामीणों से उनकी समस्याओं पर बात की।

महबूब अंसारी ने कहा कि इस हटिया से हमलोगों की रोजी-राटी जुड़ी थी। छह हफ्ता से हाट बंद है। हमलोगों को अब दो वक्त के खाने के लिए सोचना पड़ रहा है। हाट के बंद होने से रोजगार पूरी तरह बंद हो गया है। इस हाट से सिर्फ मुस्लिम ही नहीं हर जाति के लोग जुड़े हैं। सरकार हमारी माई-बाप है उसे हमसब को लेकर चलना होगा।

बरसीलाल रविदास ने कहा कि इस हाट में हम सारे लोग जुड़े हैं। हमलोग इस हाट में घास-पुआल और भैंस-काड़ा बेच कर अपना घर-संसार चला रहे थे। बंद होने से बहुत दिक्कत हो गया है।

सफीक अंसारी ने कहा कि यह हटिया हमारे बाप-दादा से चला आ रहा है। हमलोगों का कमाई इसी हटिया से था। आज पॉकेट में 10 रूपया नहीं है कि हम अपनी पोती को चोकलेट खाने के लिए पैसे दे सके।

नरेन साव ने कहा कि हम इस हटिया में पुआल बेचा करते हैं लेकिन अब मेरा रोजगार ही खत्म हो गया है।

राजकुमार मंडल ने कहा कि हम बैल लाकर बेचा करते हैं लेकिन अब हटिया बंद हो गया है। अब हम डर के मारे पशु ही लाना बंद कर दिये हैं।

बाबुलाल हांसदा ने कहा कि हमलोगों को बहुत दिक्कत हो रही है। हम घांस पुआल बेचा करते थे। अब यहां जानवर आ ही नहीं रहे हैं तो ऐसे में हमारा घांस पुआल कौन खरीदेगा। हम लोग गरीब लोग हैं हमारा तो रोजगार ही छीन गया।

राहुल मुर्मू ने कहा कि यहां पशुओं की खरीद-बिक्री नहीं होने से बहुत कष्ट हो रहा है। हमलोग गाय-बैल लाकर बेचते थे, ये सब बंद हो गया है। हम तो ऐसे ही मर जायेंगे, हम लोग आखिर करेंगे तो करेंगे क्या। जो बुढ़ा गाय-बैल हो गया है अब हम उसका क्या करेंगे।

रफीक अंसारी ने कहा कि सारी दिक्कत नियमावली से हो रही है। यहां आधार कार्ड मांग रहे हैं। छह महिना में सिर्फ दो पशु की ही खरदीदारी कर सकते हैं और खरीदने के बाद 6 महीना तक किसी को बेच भी नहीं सकते हैँ।

क्या है पशु क्रूरता निरोधक अधिनियम

पर्यावरण मंत्रालय ने पशु क्रूरता निरोधक अधिनियम के तहत सख्त पशु क्रूरता निरोधक (पशुधन बाजार नियमन) नियम, 2017 को जुलाई में अधिसूचित किया है। इस नियम के तहत पशु बाजारों में जानवरों को कत्ल करने के मकसद से पशुओं की खरीद-बिक्री को प्रतिबंधित कर दिया है। यह नियम पूरे देश में लागू हो गया है।

सभी तरह की खरीद-बिक्री पर प्रतिबंध नहीं

पशुओं की खरीद-बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। अब केवल वही लोग पशु बाजार में खरीद-बिक्री कर सकते हैं, जो कृषि भूमि के मालिक होंगे। यह नियम गाय, बैल, भैंस, बछिया-बछड़ों के साथ-साथ ऊंट की खरीद-बिक्री पर लागू होगा।

कागजी लिखा-पढ़ी पर जोर

इस नियम से पशुओं की खरीद-बिक्री में कागजी लिखा-पढ़ी काफी बढ़ गई है। अब मवेशी को खरीदने से पहले खरीददार और विक्रेता दोनों को अपना पहचान-पत्र देना होगा। इसके बाद खरीददार को बिक्री के सबूत की प्रति विक्रेता, स्थानीय राजस्व अधिकारी, पशु चिकित्सा अधिकारी और पशु बाजार समिति को देनी होगी। इस नियम में यह भी स्पष्ट किया गया है कि खरीदने के बाद पशु को 6 महीने के अंदर उसे बेचा नहीं जा सकता है।

इस नियम में यह भी कहा गया है कि पशु बाजार समिति के सदस्य सचिव पर यह जिम्मेदारी होगी कि कोई भी व्यक्ति अव्यस्क पशु को बिक्री के लिए पशु बाजार लेकर नहीं आए।

सीमाओं के निकट नहीं लगेंगे पशु बाजार

ज्यादातर पशु बाजार राज्य की सीमाओं और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पास ही लगते हैं। ऐसे में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के 50 किलोमीटर और राज्य की सीमाओं के 25 किलोमीटर के दायरे में पशु बाजार नहीं लगाया जा सकता है। अब कोई भी पशु बाजार जिला पशु बाजार कमेटी की अनुमति के बगैर नहीं लगाया जा सकता है।

 

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