फिर शुरू हो सकती है 17,572 शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया

 

रांची। झारखंड सरकार 17,572 शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया को फिर से शुरू कर सकती है। शिक्षकों की नियुक्ति के लिए निकाले गए विज्ञापन को रद्द कर फिर से बहाली प्रक्रिया शुरू करने की एकलपीठ के आदेश को निरस्त करते हुए हाईकोर्ट ने नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया है। यह फैसला कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और जस्टिस रत्नाकर भेंगरा की खंडपीठ ने सोमवार को मामले की सुनवाई के बाद दिया।

विज्ञापन के खिलाफ क्या थी याचिका

हरि शर्मा व अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया के लिए निकाले गए विज्ञापन को चुनौती दी थी। याचिका में भौतिकी के साथ गणित, जीवविज्ञान के साथ रसायनशास्त्र और इतिहास के साथ राजनीतिशास्त्र की विषयवार बाध्यता को गलत बताया था। याचिका में कहा गया था कि स्नातक की पढ़ाई में इस प्रकार की विषयवार बाध्यता नहीं है। सीधे नियुक्ति में इस प्रकार की विषयवार बाध्यता करना अनुचित है। इससे हजारों छात्र आवेदन नहीं कर पा रहे हैं।

एकलपीठ का आदेश

एकलपीठ ने मामले की सुनवाई के बाद भौतिकी व गणित और जीवविज्ञान व रसायनशास्त्र को 2015 की नियमावली के तहत सही ठहराया लेकिन इतिहास व राजनीतिशास्त्र की विषयवार बाध्यता को गलत बताया था। एकलपीठ ने सरकार की विषयवार बाध्यता को गलत ठहराते हुए शिक्षक नियुक्ति के लिए निकाले गए विज्ञापन को निरस्त कर दिया और फिर से विज्ञापन निकालने का आदेश दिया था।

हाईकोर्ट में दोनों पक्षों की दलील

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और जस्टिस रत्नाकर भेंगरा की खंडपीठ में सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता अजीत कुमार ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार ने 896 माध्यमिक विद्यालय को उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालय बनाया है। इनमें इतिहास और राजनीतिशास्त्र का ही पद स्वीकृत किया गया है। अन्य श्रेणी के विद्यालयों में भी रिक्त पदों की नियुक्ति 2015 की नियमावली के तहत ही की जा रही है। सरकार की मंशा है कि अभ्यर्थी उपरोक्त दोनों विषयों की जानकारी रखें। वहीं प्रार्थी की ओर से कहा गया कि सरकार द्वारा 2015 की नियमावली में “विषय संबंधित” कहा गया है। संबंधित विषय दो विषयों को नहीं बनाया जा सकता है क्योंकि इतिहास और राजनीतिशास्त्र दोनों अलग-अलग विषय हैं।

हाईकोर्ट का फैसला

हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद कहा कि किसी भी नियुक्ति के लिए योग्यता निर्धारण करना सरकार की नीति का विषय है। कोर्ट इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करेगी।

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