डीएसपी के घर में पुलिस प्रशिक्षु ने किया आत्महत्या

पूजा कुमारी, जोहार खबर

धनबाद(झारखण्ड):धनबाद रेल पुलिस के प्रशिक्षु आरक्षी लखीकांत प्रमाणिक ने (28 वर्ष) शनिवार सुबह करीब 9:30 बजे डीएसपी विनोद महतो के आवास के बैरक में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।वह धनबाद के तिसरा थाना क्षेत्र के चांदकुइयां रांगाटांड़ गांव का रहनेवाला था। सिटी डयूटी के लिए फिलहाल उसे डीएसपी आवास में तैनात किया गया था। सूचना मिलते ही एसआरपी एचपी जनार्दनन व अन्य पुलिस पदाधिकारी मौके पर पहुंचे. डीसी ए दोड्डे को घटना की जानकारी दी गयी. वहीं, मौके पर पहुंची पत्नी ने कहा- ‘सुबह उनसे बात हुई थी। वह खुश लग रहे थे। आधे घंटे में ऐसा क्या हो गया कि उन्होंने आत्महत्या कर ली।’ पुलिस ने मेडिकल बोर्ड गठित कर के शव का पोस्टमार्टम के लिए  भेज दिया गया है.

6 माह पूर्व ही पुलिस में बहाल हुआ था। इसके पहले वह होमगार्ड में काम करता था। शनिवार सुबह करीब 9 बजे वह अन्य पुलिसकर्मियों के साथ नाश्ता करने बाहर निकला था। नाश्ता करने के बाद वह बैरक लौट आया वहीं अन्य जवान बाहर ही रह गए। इसी दौरान करीब 9:30 बजे वह बैरक के बाहर बरामदे में गमछे से फंदा लगाकर झूल गया।

 थोड़ी देर बाद साथ गए अन्य जवान बैरक आए तो उसे फांसी से लटका देखा।  रेल एसपी की सूचना पर धनबाद थाने की पुलिस और मजिस्ट्रेट भी मौके पर पहुंचे। इधर तब तक मृतक के पिता, भाई, पत्नी और अन्य परिजन मौके पर पहुंच गए।  अचानक उसने ऐसा कदम क्यों उठा लिया, यह समझ से परे है। परिजनों के मुताबिक वह किसी मस्तिष्क संबंधी बीमारी की दवा खाता था।
मस्तिष्क संबंधी बीमारी की दवा खाता था जवान – परिजन
परिजनों के मुताबिक वह शुक्रवार को ही अपने घर से लौटा था। दरअसल 28 अगस्त से उसे प्रशिक्षण के लिए नेतरहाट जाना था। इसलिए वह गुरुवार को परिजनों से मिलने अपने घर गया था।नेपाल प्रमाणिक के तीन पुत्रों में वह दूसरे नंबर पर था.  उसकी शादी 2014 में बोकारो जिला के तुपकाडीह निवासी प्रतिमा देवी  से हुई थी. उसे दो साल का एक पुत्र प्रिंस है. परिजनों ने यह भी कहा कि मृतक मस्तिष्क से सम्बंधित कोई दवा लेता था .परिजनों के अनुसार मृतक किसी  घटना के कारण डीप्रेशन में था. जिसके बारे में उसने घर में किसी को नहीं बताया था.
                    

मृतक की पत्नी ने आत्महत्या से किया इनकार

परिजनों ने घटना के पीछे किसी तरह का कारण होने से इंकार किया।जाँच की मांग करते हुए मृतक  एसआरपी कार्यालय के अन्दर ही  धरने पर बैठ गयी। उसके अनुसार उसका पति आत्महत्या कर ही नहीं सकता था.अचानक उसने ऐसा कदम क्यों उठा लिया, यह समझ से परे है। जिस कारण इस घटना की जांच होनी चाहिये. लाखीकान्त के दोस्तों और पत्नी का कहना है की सुबह से वह खुश थें। वो किसी भी मानसिक तनाव या परेशानी में नहीं दिख रहे थे.

जांच के घेरे में है यह आत्महत्या 
अगर मृतक के शरीर को देखें तो उसमे किसी भी प्रकार का घाव या चोट नज़र नहीं आ रहा था. बहुत कम ही ऐसा होता है जहाँ कोई व्यक्ति बरामदे में आत्महत्या करता है. ज्यादातर आत्महत्या की  घटना बंद कमरे में होती है.अगर मृतक के पैर को देखें तो दोनों पैर चौकी पर टीके थें और शरीर गमछे के फंदे में लटक रहा था। पुलिस ने परिजनों को भरोसा दिलाया है कि इस घटना कि पूरी जांच कि जाएगी. पत्रकारों से बात बात करते हुए पुलिस ने कहा कि पहली नजर में घटना आत्महत्या ही प्रतीत हो रही है। साथियों और परिजनों से पता चला है कि जवान मस्तिष्क संबंधी बीमारी को लेकर दवा का सेवन करता था। अब विस्तृत जांच के बाद ही  घटना का कारण स्पष्ट होगा।

 

 

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