लिट्टीपाड़ा हार से क्या सीखे बीजेपी

रमेश भगत

लिट्टीपाड़ा विधानसभा उपचुनाव में 12900 वोट से बीजेपी को जेएमएम ने हरा दिया। इस हार से बीजेपी बिल्कुल चुप सी हो गई है। बीजेपी की चुप्पी इतनी गहरी है कि हर कोई भांप ले रहा है कि जेएमएम ने बिल्ली के गर्दन में घंटी बाँधने का काम कर दिया है। बीजेपी की गर्दन में बंधी घंटी देख कर आजसू सहित सभी विपक्षी पार्टियां खुश हैं।

 
 
लिट्टीपाड़ा विधानसभा सीट जेएमएम का अभेद किला है। इस किले को बीजेपी ने इस बार भेदने की हरसंभव कोशिश की। अचार संहिता लागू होने के साथ ही मंत्री लुइस मरांडी हर रोज अमड़ापाड़ा में बीजेपी की चुनावी तैयारी का जायजा लेने पहुंच जाती थीं। फिर धीरे – धीरे बीजेपी के सारे नेता और मंत्रियों को चुनाव में लगा दिया गया।
तब तक जेएमएम के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन अकेले गांव-गांव में प्रचार कर रहे थे। बीजेपी के आक्रामक प्रचार अभियान को देख कर जेएमएम के नेता भी हैरान थे। हैरानी तब ज्यादा बढ़ गई जब खुद मुख्यमंत्री तीन दिनों के लिए हेलीकॉप्टर से चुनावी रैलियों को संबोधित करने के इलाके में डेरा डाल दिया।
हिन्दू गैरआदिवासी, पहाड़िया, आदिवासी साफा होड़ को अपने तरफ कर और मुस्लिमों को भटका कर बीजेपी ने जीत का प्लान तैयार कर लिया था। उस पर से प्रधानमंत्री को भी साहेबगंज में गंगा पुल के शिलान्यास के बहाने बीजेपी ने चुनावी परिणाम को अपने पक्ष में करने का भरसक प्रयास किया। पैसा, हेलीकॉप्टर, मंत्री, मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री सब को चुनाव में लगा दिया गया फिर भी बीजेपी चुनाव हार गई।
जेएमएम की जीत से बड़ी बीजेपी की हार है। जेएमएम ने गुरुजी शिबू सोरेन को आगे रख और cnt-spt, स्थानीयता के साथ-साथ आरक्षण से छेड़छाड़ को मुद्दा बना कर जीत हासिल कर लिया।
इस हार में मुख्यमंत्री रघुबर दास के लिए कई नसीहतें छुपी हैं। जिन्हें जान लेना मुख्यमंत्री के लिए सही होगा। वरना उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी से विदा होने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा।
पहले पहल तो मुख्यमंत्री को चाहिए कि राज्य को तानाशाह की तरह न चलाया जाय। एक अभिभावक की तरह राज्य की जनता से व्यवहार किया जाना चाहिए। राज्य में आदिवासियों और पिछड़ी जातियों की संख्या सबसे ज्यादा है ऐसे में राज्य को मोदी और योगी की नज़र से न चलाया जाय।
दूसरा – सीएनटी-एसपीटी एक्ट से छेड़छाड़ ना की जाय। आदिवासी और मूलवासियों को यह साफ लग रहा है कि यह कदम बड़े उद्योगपतियों के हितों के लिए उठाया गया है।
तीसरा – खनिज उत्खनन में बड़े उद्योग के साथ-साथ पत्थर के उत्खनन में लगे राज्य के छोटे व्यापारियों का भी ख्याल रखा जाए। छोटे कारोबारी ज्यादा नौकरी सृजित करते हैं तथा राज्य की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत करते हैं।
चौथा – जेपीएससी में आरक्षित वर्ग के साथ हुए भेदभाव को खत्म करने का प्रयास सरकार को करना चाहिए। ये सरासर अन्याय है कि सरकार रिवर्स रिजर्वेशन की सुविधा देकर सिर्फ ऊपरी जातियों को सरकारी नौकरी में आने का मौका दे। और राज्य की बहुसंख्यक आबादी को इससे वंचित कर दे।

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